हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 13.3.20

कांड 13 → सूक्त 3 → मंत्र 20 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 13)

अथर्ववेद: | सूक्त: 3
स॒म्यञ्चं॒ तन्तुं॑ प्र॒दिशोऽनु॒ सर्वा॑ अ॒न्तर्गा॑य॒त्र्याम॒मृत॑स्य॒ गर्भे॑ । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न् ॥ (२०)
औं में पूजनीय जलतंतु को वायु पवित्र न्‌ ब्राह्मण के हिंसक को है रोहित देव! तुम शों से बांध दो. (२०)
In the air, the air to the revered water animal is the violent of the holy Brahmin, Rohit Dev! You tie it to the shaons. (20)