अथर्ववेद (कांड 13)
यद्वा॑ कृ॒णोष्योष॑धी॒र्यद्वा॑ वर्षसि भ॒द्रया॒ यद्वा॑ ज॒न्यमवी॑वृधः ॥ (१५)
कल्याणमयी वृष्टि के रूप में तुम रसते हो तथा उत्पन्न हुओं को बढ़ाते हो. (१५)
In the form of welfare rain, you get juice and increase the ones born. (15)
कांड 13 → सूक्त 7 → मंत्र 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation