हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 14.1.28

कांड 14 → सूक्त 1 → मंत्र 28 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 14)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
आ॒शस॑नंवि॒शस॑न॒मथो॑ अधिवि॒कर्त॑नम् । सू॒र्यायाः॑ पश्य रू॒पाणि॒ तानि॑ ब्र॒ह्मोतशु॑म्भति ॥ (२८)
धारी वाले वस्त्रों में सिर के वस्त्र तथा सभी अंगों पर रहने वाले वस्त्रं में कृत्या अर्थात्‌ दुष्ट स्वभाव वाली स्त्री के रूपों को देखो. इन रूपों को ब्रह्मा ही तेजस्वी करता है. (२८)
Look at the forms of a woman with an evil nature in the clothes of the head in the striped clothes and in the clothes on all the organs. It is Brahma who makes these forms bright. (28)