अथर्ववेद (कांड 14)
यु॒वं भगं॒ संभ॑रतं॒ समृ॑द्धमृ॒तं वद॑न्तावृ॒तोद्ये॑षु । ब्रह्म॑णस्पते॒ पति॑म॒स्यै रो॑चय॒चारु॑ संभ॒लो व॑दतु॒ वाच॑मे॒ताम् ॥ (३१)
हे पति और पत्नी! तुम दोनों सत्य व्यवहारों के रहते हुए तथा सत्य भाषण करते हुए समृद्धि वाला भाग्य प्राप्त करो. हे बृहस्पति! इस पत्नी के हृदय में पति के प्रति रुचि उत्पन्न करो. पति इस के प्रति सुंदर वाणी बोले. (३१)
O husband and wife! Both of you attain a prosperous fortune by living in true behaviors and making true speeches. O Jupiter! Create interest in the husband in the heart of this wife. The husband spoke beautifully towards this. (31)