अथर्ववेद (कांड 14)
इ॒हेद॑साथ॒ नप॒रो ग॑माथे॒मं गा॑वः प्र॒जया॑ वर्धयाथ । शुभं॑ यतीरु॒स्रियाः॒ सोम॑वर्चसो॒विश्वे॑ दे॒वाः क्र॑न्नि॒ह वो॒ मनां॑सि ॥ (३२)
हे गायो! तुम यहां ही रहो. तुम यहां से दूर मत जाओ. तुम इसे उत्तम संतान के साथ बढ़ाओ. हे गायो! तुम शुभ को प्राप्त कराने वाली तथा चंद्रमा की किरणों के समान प्रभा वाली बनो. सभी देव तुम्हारे हृदयों को स्थिर बनाएं. (३२)
O sing! You stay here. Don't you get away from here. You raise it with the best offspring. O sing! You become the one who receives the auspicious and the one with the same aura as the rays of the moon. May all gods make your hearts stable. (32)