हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 14.1.35

कांड 14 → सूक्त 1 → मंत्र 35 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 14)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
यच्च॒ वर्चो॑अ॒क्षेषु॒ सुरा॑यां च॒ यदाहि॑तम् । यद्गोष्व॑श्विना॒ वर्च॒स्तेने॒मांवर्च॑सावतम् ॥ (३५)
हे अश्विनीकुमारो! जो तेज आंखों में होता है, जो संपत्ति में स्थान प्राप्त करता है तथा जो तेज गायों में है, उसी तेज से इस की रक्षा करो. (३५)
O Ashwinikumaro! Protect it with the same sharp eye, which gains place in property and what is in fast cows. (35)