अथर्ववेद (कांड 14)
इ॒दम॒हं रुश॑न्तंग्रा॒भं त॑नू॒दूषि॒मपो॑हामि । यो भ॒द्रो रो॑च॒नस्तमुद॑चामि ॥ (३८)
मैं शरीर में दोष उत्पन्न करने वाले विनाशक रोग को दूर करता हूं. जो कल्याणमय तेजस्वी है, उसे अपने पास बुलाता हूं. (३८)
I remove the destructive disease that causes defects in the body. I call the one who is a good-hearted tejashwi to me. (38)