हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 14.1.51

कांड 14 → सूक्त 1 → मंत्र 51 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 14)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
भग॑स्ते॒हस्त॑मग्रहीत्सवि॒ता हस्त॑मग्रहीत् । पत्नी॒ त्वम॑सि॒ धर्म॑णा॒हं गृ॒हप॑ति॒स्तव॑ ॥ (५१)
भग तथा सूर्य देव ने तेरा हाथ पकड़ा है, इसलिए तू धर्मपूर्वक मेरी पत्नी है और मैं तेरा पति हूं. (५१)
God and The Sun God have held your hand, so you are righteously my wife and I am your husband. (51)