हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 14.1.52

कांड 14 → सूक्त 1 → मंत्र 52 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 14)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
ममे॒यम॑स्तु॒पोष्या॒ मह्यं॑ त्वादा॒द्बृह॒स्पतिः॑ । मया॒ पत्या॑ प्रजावति॒ सं जी॑व श॒रदः॑श॒तम् ॥ (५२)
बृहस्पति ने तुझे मेरे लिए दिया है. तू मुझ पति के साथ रहती हुई संतान वाली बन तथा सौ वर्ष की आयु भोगती हुई मेरी पोष्या अर्थात्‌ पुष्ट होने वाली और पोषण प्राप्त करने वाली बन. (५२)
Jupiter has given you for me. You should live with my husband and have children and at the age of a hundred years, become my nourishment and nourishment. (52)