अथर्ववेद (कांड 14)
शि॒वानारी॒यमस्त॒माग॑न्नि॒मं धा॒ता लो॒कम॒स्यै दि॑देश । ताम॑र्य॒मा भगो॑ अ॒श्विनो॒भाप्र॒जाप॑तिः प्र॒जया॑ वर्धयन्तु ॥ (१३)
इस स्त्री के लिए धाता ने घर के रूप में लोक का निर्माण किया है. यह कल्याणी इसे प्राप्त हो गई है. इस वधू को अश्विनीकुमार, अर्यमा, भग और प्रजापति संतान के द्वारा बढ़ाएं. (१३)
For this woman, Dhata has created folk as a home. This Kalyani has received it. Raise this bride through Ashwinikumar, Aryama, Bhaga and Prajapati children. (13)