अथर्ववेद (कांड 14)
सु॑मङ्ग॒लीप्र॒तर॑णी गृ॒हाणां॑ सु॒शेवा॒ पत्ये॒ श्वशु॑राय शं॒भूः । स्यो॒ना श्व॒श्र्वै प्रगृ॒हान्वि॑शे॒मान् ॥ (२६)
तू कल्याणकारी, पति को सुख देने वाली, घर का काम करने वाली ससुर और सास के लिए सुखकारिणी होती हुई घर में प्रवेश कर. (२६)
You enter the house being a benefactor, giving happiness to the husband, father-in-law who does household work and happiness for the mother-in-law. (26)