हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 14.2.48

कांड 14 → सूक्त 2 → मंत्र 48 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 14)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
अपा॒स्मत्तम॑उच्छतु॒ नीलं॑ पि॒शङ्ग॑मु॒त लोहि॑तं॒ यत्।नि॑र्दह॒नी या पृ॑षात॒क्यस्मिन्तांस्था॒णावध्या स॑जामि ॥ (४८)
जो नीला, पीला तथा लाल रंग का अंधकार है, वह हम से दूर रहे. जो जलाने वाली दोष की स्थिति इस में है, मैं उसे इस स्तंभ में लगा देता हूं. (४८)
The darkness of blue, yellow and red should stay away from us. I put the burning defect in this column. (48)