अथर्ववेद (कांड 14)
इ॒यं नार्युप॑ब्रूते॒ पूल्या॑न्यावपन्ति॒का । दी॒र्घायु॑रस्तु मे॒ पति॒र्जीवा॑ति श॒रदः॑ श॒तम् ॥ (६३)
अग्नि में खीलों की आहुति देती हुई यह वधू कामना करती है कि मेरा पति दीर्घ आयु वाला हो और सौ वर्ष तक जीवित रहे. (६३)
Sacrificing cucumbers in the agni, this bride wishes that my husband is long-lived and lives for a hundred years. (63)