अथर्ववेद (कांड 14)
ज॑नि॒यन्ति॑ना॒वग्र॑वः पुत्रि॒यन्ति॑ सु॒दान॑वः । अरि॑ष्टासू सचेवहि बृह॒ते वाज॑सातये ॥ (७२)
हे पत्नी! अविवाहित लोग हम लोगों के समान विवाह करने की इच्छा करते हैं. दाता लोग पुत्र की कामना करते हैं. जब तक हमारे शरीरों में प्राण रहें, तब तक हम दोनों एकत्र हों तथा बल प्राप्ति के लिए मिल कर रहें. (७२)
O wife! Unmarried people wish to marry like us. Donors wish for a son. As long as there is life in our bodies, let us both gather and stay together to get strength. (72)