हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 14.2.74

कांड 14 → सूक्त 2 → मंत्र 74 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 14)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
येदंपूर्वाग॑न्रशना॒यमा॑ना प्र॒जाम॒स्यै द्रवि॑णं चे॒ह द॒त्त्वा । तांव॑ह॒न्त्वग॑त॒स्यानु॒ पन्थां॑ वि॒राडि॒यं सु॑प्र॒जा अत्य॑जैषीत् ॥ (७४)
रस्सी के समान बांधने वाली जो नारी पहले इस स्थान को प्राप्त हुई थी, हम संतान और धन के द्वारा उस वधू को उस मार्ग से ले जाएं, जिस पर अब तक कोई नहीं चला है. (७४)
The woman who tied this place like a rope, let us take that bride through children and money on the path on which no one has walked so far. (74)