अथर्ववेद (कांड 16)
शि॒वेन॑ मा॒चक्षु॑षा पश्यतापः शि॒वया॑ त॒न्वोप॑ स्पृशत॒ त्वचं॑ मे ॥ (१२)
हे जल! लुम मुझे कृपा की दृष्टि से देखो और अपने कल्याणकारक भाग से मेरी त्वचा का स्पर्श करो. (१२)
O water! Lum look at me gracefully and touch my skin with your healing part. (12)