हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 16.1.13

कांड 16 → सूक्त 1 → मंत्र 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 16)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
शि॒वान॒ग्नीन॑प्सु॒षदो॑ हवामहे॒ मयि॑ क्ष॒त्रं वर्च॒ आ ध॑त्त दे॒वीः ॥ (१३)
हम जल में व्याप्त और मंगलकारिणी अग्नियों को बुलाते हैं. यह जल मुझे क्षमाबल वाली शक्ति से संपन्न करे. (१३)
We call the agnis prevailing in the water and mangalkarini. May this water endow me with the power of forgiveness. (13)