हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 16.8.33

कांड 16 → सूक्त 8 → मंत्र 33 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 16)

अथर्ववेद: | सूक्त: 8
तस्ये॒दंवर्च॒स्तेजः॑ प्रा॒णमायु॒र्नि वे॑ष्टयामी॒दमे॑नमध॒राञ्चं॑ पादयामि ॥ (३३)
हम उस के तेज, बल, प्राण और आयु को लपेट कर उसे औंथे मुंह गिराते हैं. (३३)
We wrap his glory, strength, life and age and make him fall face down. (33)