हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 16.9.1

कांड 16 → सूक्त 9 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 16)

अथर्ववेद: | सूक्त: 9
जि॒तम॒स्माक॒मुद्भि॑न्नम॒स्माक॑म॒भ्यष्ठां॒ विश्वाः॒ पृत॑ना॒ अरा॑तीः ॥ (१)
शत्रुओं को घायल कर के लाए हुए पदार्थ तथा जीते हुए पदार्थ हमारे हैं. हम शत्रुओं की सेना पर अधिकार करें. (१)
The substances brought by injuring the enemies and the living substances are ours. Let us take control of the enemy's army. (1)