अथर्ववेद (कांड 16)
अग॑न्म॒ स्वःस्वरगन्म॒ सं सूर्य॑स्य॒ ज्योति॑षागन्म ॥ (३)
हमें स्वर्ग प्राप्त है, जो लोक सूर्य की ज्योति से उत्तम बना है, हम उसे प्राप्त करें. (३)
We have heaven, which is made better by the light of the world sun, we should get it. (3)