अथर्ववेद (कांड 18)
अध॒ त्यंद्र॒प्सं वि॒भ्वं विचक्ष॒णं विराभ॑रदिषि॒रः श्ये॒नो अ॑ध्व॒रे । यदी॒ विशो॑वृ॒णते॑ द॒स्ममार्या॑ अ॒ग्निं होता॑र॒मध॒ धीर॑जायत ॥ (२१)
जब सोम के लाए जाने के बाद यह को पूरा करने वाली अग्नि का वरण किया जाता है, तब सोम और अग्ने के सिद्ध होने पर अग्निष्टोम आदि कर्म भी पूर्ण होते हैं. (२१)
When the agni that completes it is selected after the bringing of Soma, then the karma of Agnistom etc. is also completed when Soma and Agni are proved. (21)