अथर्ववेद (कांड 18)
उ॑रूण॒साव॑सु॒तृपा॑वुदुम्ब॒लौ य॒मस्य॑ दू॒तौ च॑रतो॒ जनाँ॒ अनु॑ । ताव॒स्मभ्यं॑दृ॒शये॒ सूर्या॑य॒ पुन॑र्दाता॒मसु॑म॒द्येह भ॒द्रम् ॥ (१३)
बड़ीबड़ी नाक वाले प्राणियों के प्राणों से तृप्ति को प्राप्त हुए तथा प्राणों का अपहरण करने वाले महाबली यमदूत सभी जगह घूमते हैं. ये दोनों दूत सूर्य दर्शन के निमित्त पांच इंद्रियों वाले प्राण को हमारे शरीर में पुन: स्थापित करें. (१३)
Mahabali Yamdoot, who attained fulfillment from the lives of large-nosed creatures and abducted the lives, roams everywhere. These two messengers should restore the five-sense prana in our body for the sake of sun sighting. (13)