हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 18.2.14

कांड 18 → सूक्त 2 → मंत्र 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 18)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
सोम॒ एके॑भ्यःपवते घृ॒तमेक॒ उपा॑सते । येभ्यो॒ मधु॑ प्र॒धाव॑ति॒ तांश्चि॑दे॒वापि॑ गच्छतात् ॥ (१४)
कुछ पितरों के लिए नदी के रूप में सोमरस बहता है. अन्य पितर घृत का उपभोग करते हैं. ब्रह्म याग में अथर्ववेद के मंत्रों का पाठ करने वालों के लिए मधु अर्थात्‌ शहद की नदी है. हे मृतात्मा को प्राप्त प्रेत! तू उन सब को प्राप्त हो. (१४)
Somers flows as a river for some ancestors. Other ancestors consume ghee. For those who recite the mantras of Atharvaveda in Brahma Yag, madhu i.e. the river of honey. O ghost of the dead! You get them all. (14)