अथर्ववेद (कांड 18)
मा ते॒ मनो॒मासो॒र्माङ्गा॑नां॒ मा रस॑स्य ते । मा ते॑ हास्त त॒न्वः किं च॒नेह ॥ (२४)
हे प्रेत! तेरा मन और तेरी इंद्रियां तेरा त्याग न करें. तेरे प्राण के किसी अंश का क्षय न हो. तेरे शरीर के अंगों में किसी प्रकार का विकार न हो. तेरे शरीर में रुधिर रस आदि भी पूरी मात्रा में रहें. तेरा कोई भी भाग तुझ से अलग न हो. (२४)
O ghost! Let your mind and your senses not abandon you. Let no part of your life be lost. There should be no disorder in your body parts. Blood juice etc. should also be in full quantity in your body. No part of you should be separated from you. (24)