हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 18.2.37

कांड 18 → सूक्त 2 → मंत्र 37 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 18)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
ददा॑म्यस्माअव॒सान॑मे॒तद्य ए॒ष आग॒न्मम॒ चेदभू॑दि॒ह । य॒मश्चि॑कि॒त्वान्प्रत्ये॒तदा॑ह॒ममै॒ष रा॒य उप॑ तिष्ठतामि॒ह ॥ (३७)
यम का वचन-यह आया हुआ पुरुष मेरा हो तो मैं उसे स्थान दूं. अब यह मेरे पास आया है. यदि यह मेरा स्तवन करता रहे तो यहां रह सकता है. (३७)
Yama's word - If this man who has come is mine, then I should give him a place. Now it has come to me. If it keeps praising me, it can stay here. (37)