अथर्ववेद (कांड 18)
वी॒मां मात्रां॑ मिमीमहे॒ यथाप॑रं॒ न मासा॑तै । श॒ते श॒रत्सु॑ नो पु॒रा ॥ (४१)
हम इस श्मशान भूमि को विशेष प्रकार से नापते हैं, जिस से हमें सौ वर्ष से पहले बीच में ही दूसरा श्मशान कर्म प्राप्त न हो. (४१)
We measure this cremation ground in a special way, so that we do not get another cremation work in the middle before a hundred years. (41)