अथर्ववेद (कांड 18)
उत्ते॑ स्तभ्नामिपृथि॒वीं त्वत्परी॒मं लो॒गं नि॒दध॒न्मो अ॒हं रि॑षम् । ए॒तां स्थूणां॑ पि॒तरो॑धारयन्ति ते॒ तत्र॑ य॒मः साद॑ना ते कृणोतु ॥ (५२)
हे मृत पुरुष! तेरे लिए मैं इस पृथ्वी को ऊंची बनाता हूं. तेरे चारों ओर सभी प्राणियों से युक्त इस भूलोक को धारण करता हुआ मैं हिंसा का आधार न बनूं. पितृ देवता उस प्रसिद्ध यूनी को तुम्हारे घर का निर्णायक करने के लिए स्थापित करते हैं. (५२)
O dead man! For you, I make this earth high. I should not become the basis of violence by holding this land of all beings around you. The father god installs that famous Uni to decide your house. (52)