अथर्ववेद (कांड 18)
इ॒मानारी॑रविध॒वाः सु॒पत्नी॒राञ्ज॑नेन स॒र्पिषा॒ सं स्पृ॑शन्ताम् । अ॑न॒श्रवो॑अनमी॒वाः सु॒रत्ना॒ आ रो॑हन्तु॒ जन॑यो॒ योनि॒मग्रे॑ ॥ (५७)
प्रेत के कुल में उत्पन्न ये नारियां वैधव्य से हीन श्रेष्ठ पतियों वाली होती हुई घृत से मिले हुए अंजन से स्पर्श प्राप्त करें. ये आंसू न बहाने वाली, रोगरहित और शोभन आभरणों वाली हो कर संतान को जन्म देने के लिए स्वस्थ हों. (५७)
These women born in the family of ghosts should be touched by the anjan mixed with hatred, being the best husbands who are devoid of legal purpose. They should be non-shedding, disease-free and adorned and healthy to give birth to children. (57)