अथर्ववेद (कांड 18)
पुन॑र्देहिवनस्पते॒ य ए॒ष निहि॑त॒स्त्वयि॑ । यथा॑ य॒मस्य॒ साद॑न॒ आसा॑तै वि॒दथा॒ वद॑न् ॥ (७०)
हे वनस्पति! तुझ में जो अस्थि रूप पुरुष अर्थात् पुरुष की हड्डियों का ढांचा छिपा हुआ है, उसे हमें प्रदान करो. जिस से वह यमराज के घर में यज्ञ संबंधी कार्य करता हुआ स्थित हो सके. (७०)
O vegetation! Give us the bone form that is hidden in you, that is, the structure of the man's bones. So that he can be located in Yamraj's house while doing yagya related work. (70)