हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 18.4.42

कांड 18 → सूक्त 4 → मंत्र 42 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 18)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
यं ते॑ म॒न्थंयमो॑द॒नं यन्मां॒सं नि॑पृ॒णामि॑ ते । ते ते॑ सन्तु स्व॒धाव॑न्तो॒ मधु॑मन्तोघृत॒श्चुतः॑ ॥ (४२)
हे प्रेत! मैं तेरे लिए जो मंथ अर्थात्‌ दही मथने से प्राप्त मकखन दे रहा हूं, यह तुझे स्वधा और घृत से संपन्न हो कर प्राप्त हो. (४२)
O ghost! May you get the month that I am giving you the makkhan i.e. by churning curd, it should be accomplished by swadha and ghee. (42)