हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 18.4.86

कांड 18 → सूक्त 4 → मंत्र 86 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 18)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
येऽत्र॑ पि॒तरः॑पि॒तरो॒ येऽत्र॑ यू॒यं स्थ यु॒ष्मांस्तेऽनु॑ यू॒यं तेषां॒ श्रेष्ठा॑ भूयास्थ ॥ (८६)
ये अन्य पितर यहां हैं. जो पितृगण यहां पर हैं. अन्य पितर तुम्हारे अनुकूल हों. (८६)
These other fathers are here. The ancestors who are here. May the other father suit you. (86)