अथर्ववेद (कांड 19)
अ॒भि गो॒त्राणि॒ सह॑सा॒ गाह॑मानोऽदा॒य उ॒ग्रः श॒तम॑न्यु॒रिन्द्रः॑ । दु॑श्च्यव॒नः पृ॑तना॒षाड॑यो॒ध्यो॒ऽस्माकं॒ सेना॑ अवतु॒ प्र यु॒त्सु ॥ (७)
इंद्र युद्ध क्षेत्र में अपनी शक्ति से शन्रु सेना के सामने से प्रवेश करने वाले, दयाहीन, क्रोध करने वाले एवं प्रचंड पराक्रमी हैं. ये शत्रुओं की सेना को वश में कर लेते हैं. कोई भी इन्हें युद्ध क्षेत्र से भगाने में समर्थ नहीं है. ये शत्रु सेनाओं को पराजित करने वाले हैं. इन से युद्ध करने में कोई भी समर्थ नहीं है. इस प्रकार के इंद्र युद्धों में हमारी सेना की रक्षा करें. (७)
Indra is a man of mercy, anger and a great power to enter the battlefield from the front of the Army of Shanru. They control the army of enemies. No one is able to drive them out of the war zone. They are going to defeat the enemy armies. No one is capable of fighting them. Protect our army in these types of Indra wars. (7)