हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 19.18.3

कांड 19 → सूक्त 18 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 19)

अथर्ववेद: | सूक्त: 18
सोमं॒ ते रु॒द्रव॑न्तमृच्छन्तु । ये मा॑ऽघा॒यवो॒ दक्षि॑णाया दि॒शोऽभि॒दासा॑त् ॥ (३)
दूसरों की हिंसा करने के इच्छुक जो शत्रु दक्षिण दिशा से आ कर रात्रि की पूजा करने वाले मेरी हिंसा करें, वे शत्रु अपने विनाश के लिए रुद्रों का सहयोग प्राप्त करने वाले सोम को प्राप्त हों. (३)
The enemies who want to violence others, who come from the south direction and worship me at night, those enemies should be received by Som, who gets the support of Rudras for their destruction. (3)