हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 19.18.8

कांड 19 → सूक्त 18 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 19)

अथर्ववेद: | सूक्त: 18
इन्द्रं॒ ते म॒रुत्व॑न्तमृच्छन्तु । ये मा॑ऽघा॒यव॑ ए॒तस्या॑ दि॒शोऽभि॒दासा॑त् ॥ (८)
दूसरों की हिंसा करने के इच्छुक जो शत्रु उत्तर दिशा से आ कर रात्रि की अर्चना करने वाले मेरी हिंसा करें, वे मरुतों का सहयोग प्राप्त करने वाले इंद्र को अपने विनाश के लिए प्राप्त हों. (८)
Enemies who want to violence others, who come from the north and worship me at night, should receive the support of the marutas for their destruction. (8)