अथर्ववेद (कांड 19)
योगे॑योगे त॒वस्त॑रं॒ वाजे॑वाजे हवामहे । सखा॑य॒ इन्द्र॑मू॒तये॑ ॥ (७)
हम स्तुतिकर्ता सभी अप्राप्त फलों की प्राप्ति होने पर तथा अन्नादि की प्राप्ति होने पर इंद्र देव को अपनी रक्षा के लिए बुलाते हैं. (७)
We praisers call Upon Indra Dev to protect us when we receive all the unsweetened fruits and when we receive food. (7)