अथर्ववेद (कांड 19)
पु॒ष्टिं प॑शू॒नां परि॑ जग्रभा॒हं चतु॑ष्पदां द्वि॒पदां॒ यच्च॑ धा॒न्यम् । पयः॑ पशू॒नां रस॒मोष॑धीनां॒ बृह॒स्पतिः॑ सवि॒ता मे॒ नि य॑च्छात् ॥ (५)
उदुंबर मणि के तेज से तथा बृहस्पति और सविता देव की कृपा से मैं दो पैरों वाले मनुष्यों, चार पैरों वाले पशुओं तथा गेहूं, जौ आदि अन्नों की अधिकता स्वीकार करूं, ये देव मुझे पशुओं का दूध और ओषधियां अर्थात् जड़ीबूटियों का रस प्रदान करें. (५)
With the radiance of Udumbar Mani and by the grace of Jupiter and Savita, may I accept the abundance of two-legged humans, four-legged animals and wheat, barley, etc., may these gods give me animal milk and medicinal juices. (5)