अथर्ववेद (कांड 19)
प्रि॒यं मा॑ दर्भ कृणु ब्रह्मराज॒न्याभ्यां शू॒द्राय॒ चार्या॑य च । यस्मै॑ च का॒मया॑महे॒ सर्व॑स्मै च वि॒पश्य॑ते ॥ (८)
हे दर्भ! मुझ धारणकर्ता को ब्राह्मण, क्षत्रिय, शूद्र तथा श्रेष्ठ जनों का प्रिय बनाओ. अनुलोम और प्रतिलोम जाति के मध्य जिन लोगों को मैं अपना प्रिय बनाना चाहूं, पाप अन्वेषण करने वाले उस पुरुष को मेरा प्रिय बनाओ. (८)
O darbh! Make me the holder dear to Brahmins, Kshatriyas, Shudras and superiors. Dear to the man who discovers sins of those whom I want to make my beloved between the Anulom and the Antilom race. (8)