अथर्ववेद (कांड 19)
प्राण॑ प्रा॒णं त्रा॑यस्वासो॒ अस॑वे मृड । निरृ॑ते॒ निरृ॑त्या नः॒ पाशे॑भ्यो मुञ्च ॥ (४)
हे प्राण रूप आंजन! तुम मेरे प्राण की रक्षा करो तथा अकाल में नष्ट न होने वाला बनाओ. हे प्राणरूप आंजन! तुम प्राणों को सुखी बनाओ. हे निरृति रूप आंजन! हमें निर्त्ऋति के फंदों से छुड़ाओ. (४)
O soul- You protect my life and make it not to be destroyed in famine. O soul-like anjan! Make your soul happy. O nirriti roop anjan! Get us out of the trap of nirtiti. (4)