हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 19.51.2

कांड 19 → सूक्त 51 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 19)

अथर्ववेद: | सूक्त: 51
दे॒वस्य॑ त्वा सवि॒तुः प्र॑स॒वेऽश्विनो॑र्बा॒हुभ्यां॑ पू॒ष्णो हस्ता॑भ्यां॒ प्रसू॑त॒ आ र॑भे ॥ (२)
हे कर्म! मैं सब के प्रेरक सविता देव की आज्ञा से, अश्चिनीकुमारों की भुजाओं से तथा पूषा देव के हाथों से तेरा आरंभ करता हूं. (२)
O karma! I start you with the command of Savita Dev, the motivator of all, with the arms of Ashchinikumars and with the hands of Pusha Dev. (2)