अथर्ववेद (कांड 19)
दे॒वस्य॑ त्वा सवि॒तुः प्र॑स॒वेऽश्विनो॑र्बा॒हुभ्यां॑ पू॒ष्णो हस्ता॑भ्यां॒ प्रसू॑त॒ आ र॑भे ॥ (२)
हे कर्म! मैं सब के प्रेरक सविता देव की आज्ञा से, अश्चिनीकुमारों की भुजाओं से तथा पूषा देव के हाथों से तेरा आरंभ करता हूं. (२)
O karma! I start you with the command of Savita Dev, the motivator of all, with the arms of Ashchinikumars and with the hands of Pusha Dev. (2)