अथर्ववेद (कांड 19)
या ते॒ वसो॒र्वात॒ इषुः॒ सा त॑ ए॒षा तया॑ नो मृड । रा॒यस्पोषे॑ण॒ समि॒षा मद॑न्तो॒ मा ते॑ अग्ने॒ प्रति॑वेशा रिषाम ॥ (२)
हे निवास करने वाले अग्नि देव! तुम्हारी तथा अन्य देवों की जो कृपामयी बुद्धि है, अपनी इस बुद्धि से हमारी रक्षा करो. धन और अन्न से प्रसन्न होते हुए हम तुम्हारा सामीप्य प्राप्त करें और हम नाश को प्राप्त न हों. (२)
O God of agni! Protect us with this wisdom of yours, which is the kind intellect of you and other gods. Pleased with wealth and food, let us get close to you and we should not get to destruction. (2)