अथर्ववेद (कांड 19)
वर्च॑सो द्यावापृथि॒वी सं॒ग्रह॑णी बभू॒वथु॒र्वर्चो॑ गृहीत्वा पृथि॒वीमनु॒ सं च॑रेम । य॒शसं॒ गावो॒ गोप॑ति॒मुप॑ तिष्ठन्त्याय॒तीर्यशो॑ गृही॒त्वा पृ॑थि॒वीमनु॒ सं च॑रेम ॥ (३)
हे आकाश और पृथ्वी! तुम हमें तेज प्रदान करने वाली बनो. हम तेज ग्रहण कर के पृथ्वी पर संचरण करें. गायों के स्वामी मेरे अधिकार में अन्न और गाएं स्थित हैं. हम आती हुई गायों को ग्रहण कर के पृथ्वी पर संचरण करें. (३)
O heaven and earth! You be the one providing us fast. We take a fast eclipse and transmit on earth. The owners of cows are located in my possession, food and cows. We should take the coming cows and transmit them to the earth. (3)