अथर्ववेद (कांड 2)
सू॒रिर॑सि वर्चो॒धा अ॑सि तनू॒पानो॑ ऽसि । आ॑प्नु॒हि श्रेयां॑स॒मति॑ स॒मं क्रा॑म ॥ (४)
हे मणि! तू हमारे शत्रुओं द्वारा किए गए जादू टोनों को जानने वाली, तेजस्विनी एवं हमारे शरीरों की रक्षा करने वाली है. तू हम से अधिक शक्तिशाली शत्रु को मारने के लिए पकड़ एवं हमारे समान शक्ति वाले शत्रु को छोड़ कर आगे चली जा. (४)
O Mani! You know the magic tones done by our enemies, Tejaswini and protect our bodies. Catch an enemy more powerful than us and leave an enemy with the same power as us and move forward. (4)