हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 11
दूष्या॒ दूषि॑रसि हे॒त्या हे॒तिर॑सि मे॒न्या मे॒निर॑सि । आ॑प्नु॒हि श्रेयां॑स॒मति॑ स॒मं क्रा॑म ॥ (१)
हे तिलक वृक्ष से निर्मित मणि! विनाश करने वाली कृत्या का तू निवारण करती है. तू युद्धों को नष्ट एवं वज्र को असफल करने वाली है. तू हम से अधिक शक्तिशाली शत्रु को मारने के लिए पकड़ तथा हमारे समान शक्तिशाली शत्रु को छोड़ कर चली जा. (१)
O gem made of tilak tree! You remove the act of destruction. You are going to destroy wars and fail thunderbolts. You hold on to kill an enemy more powerful than us and leave an enemy as powerful as us. (1)

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 11
स्र॒क्त्योऽसि॑ प्रतिस॒रोऽसि॑ प्रत्यभि॒चर॑णोऽसि । आ॑प्नु॒हि श्रेयां॑स॒मति॑ स॒मं क्रा॑म ॥ (२)
हे मणि! तू तिलक वृक्ष से निर्मित है. तू कृत्या आदि को भगाने वाला रक्षा सूत्र है. तू दूसरों के द्वारा किए गए जादूटोनों का निवारण करने वाली है. तू मुझ से अधिक शक्तिशाली शत्रु को मारने के लिए पकड़ तथा मेरे समान शक्तिशाली शत्रु को छोड़ कर आगे बढ़ जा. (२)
O gem! You are made of tilak tree. You are the defense formula that drives away the work etc. You are going to remove the magicians done by others. Hold on to kill an enemy more powerful than Me and leave an enemy as powerful as me and move forward. (2)

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 11
प्रति॒ तम॒भि च॑र॒ यो ऽस्मान्द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः । आ॑प्नु॒हि श्रेयां॑स॒मति॑ स॒मं क्रा॑म ॥ (३)
जो शत्रु हम से और हमारे पुत्रों, बांधवों तथा पशुओं से द्वेष करता है एवं हम जिस के विनाश की इच्छा करते हैं, हे मणि! तुम इन दोनों प्रकार के शत्रुओं का विनाश करो. तुम मुझ से अधिक शक्तिशाली शत्रु को मारने के लिए पकड़ो तथा मेरे समान शक्ति वाले शत्रु को छोड़ कर आगे बढ़ जाओ. (३)
The enemy who hates us and our sons, brothers and animals and whom we desire to destroy, O Gem! You destroy these two types of enemies. You hold on to kill an enemy more powerful than Me and leave the enemy of the same power as me and move forward. (3)

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 11
सू॒रिर॑सि वर्चो॒धा अ॑सि तनू॒पानो॑ ऽसि । आ॑प्नु॒हि श्रेयां॑स॒मति॑ स॒मं क्रा॑म ॥ (४)
हे मणि! तू हमारे शत्रुओं द्वारा किए गए जादू टोनों को जानने वाली, तेजस्विनी एवं हमारे शरीरों की रक्षा करने वाली है. तू हम से अधिक शक्तिशाली शत्रु को मारने के लिए पकड़ एवं हमारे समान शक्ति वाले शत्रु को छोड़ कर आगे चली जा. (४)
O Mani! You know the magic tones done by our enemies, Tejaswini and protect our bodies. Catch an enemy more powerful than us and leave an enemy with the same power as us and move forward. (4)

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 11
शु॒क्रोऽसि॑ भ्रा॒जोऽसि॒ स्व॑रसि॒ ज्योति॑रसि । आ॑प्नु॒हि श्रेयां॑स॒मति॑ स॒मं क्रा॑म ॥ (५)
हे मणि! तू शत्रुओं को शोक में डुबाने वाली, तेजस्विनी, संताप देने वाली एवं ज्योति के समान न छूने योग्य है. तू मुझ से अधिक शक्तिशाली शत्रु को मारने के लिए पकड़ ले और मेरे समान शक्ति वाले शत्रु को छोड़ कर आगे बढ़ जा. (५)
O Mani! You are the one who plunges enemies into mourning, shines, gives anger and is not worth touching like a light. Hold on to kill an enemy more powerful than me, and leave an enemy with the same power as me and move on. (5)