अथर्ववेद (कांड 2)
ओजो॒ऽस्योजो॑ मे दाः॒ स्वाहा॑ ॥ (१)
हे अग्नि! तुम ओज हो. इसीलिए मुझ में ओज धारण करो. यह हवि भलीभांति हवन किया हुआ हो. (१)
O agni! You're Oz. That's why put the oz in me. This havi is well done havan. (1)
कांड 2 → सूक्त 17 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation