हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 17
ओजो॒ऽस्योजो॑ मे दाः॒ स्वाहा॑ ॥ (१)
हे अग्नि! तुम ओज हो. इसीलिए मुझ में ओज धारण करो. यह हवि भलीभांति हवन किया हुआ हो. (१)
O agni! You're Oz. That's why put the oz in me. This havi is well done havan. (1)

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 17
सहो॑ ऽसि॒ सहो॑ मे दाः॒ स्वाहा॑ ॥ (२)
हे अग्नि! तुम शत्रुओं को पराजित करने में समर्थ तेज हो, इसीलिए तुम मुझे तेज प्रदान करो. यह हवि भलीभांति हवन किया हुआ हो. (२)
O agni! You are able to defeat enemies, that is why you give me glory. This havi is well done havan. (2)

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 17
बल॑मसि॒ बलं॑ दाः॒ स्वाहा॑ ॥ (३)
हे अग्नि! तुम बल हो, इसीलिए मुझे बल प्रदान करो. यह हवि भलीभांति हवन किया हुआ हो. (३)
O agni! You are a force, that's why give me strength. This havi is well done havan. (3)

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 17
आयु॑र॒स्यायु॑र्मे दाः॒ स्वाहा॑ ॥ (४)
हे अग्नि देव! तुम आयु हो, इसीलिए मुझे आयु प्रदान करो. यह हवि भलीभांति हवन किया हुआ हो. (४)
O God of Agni! You are age, that's why give me age. This havi is well done havan. (4)

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 17
श्रोत्र॑मसि॒ श्रोत्रं॑ मे दाः॒ स्वाहा॑ ॥ (५)
हे अग्नि देव! तुम श्रोत्र हो, इसीलिए मुझे श्रोत्र अर्थात्‌ सुनने की शक्ति प्रदान करो. यह हवि भलीभांति हवन किया हुआ हो. (५)
O God of Agni! You are a source, that is why give me the power to listen. This havi is well done havan. (5)

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 17
चक्षु॑रसि॒ चक्षु॑र्मे दाः॒ स्वाहा॑ ॥ (६)
हे अग्नि देव! तुम चक्षु हो, इसीलिए मुझे चक्षु अर्थात्‌ देखने की शक्ति प्रदान करो. यह हवि भलीभांति हवन किया हुआ हो. (६)
O God of Agni! You are the eye, that is why give me the power to see. This havan is well done. (6)

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 17
प॑रि॒पाण॑मसि परि॒पाणं॑ मे दाः॒ स्वाहा॑ ॥ (७)
हे अग्नि देव! तुम सभी प्रकार से पालन करने वाले हो, इसीलिए मेरा पालन करो. यह हवि भलीभांति हवन किया हुआ हो. (७)
O God of Agni! You are going to follow in all ways, that's why follow me. This havi is well done havan. (7)