अथर्ववेद (कांड 2)
आयु॑र॒स्यायु॑र्मे दाः॒ स्वाहा॑ ॥ (४)
हे अग्नि देव! तुम आयु हो, इसीलिए मुझे आयु प्रदान करो. यह हवि भलीभांति हवन किया हुआ हो. (४)
O God of Agni! You are age, that's why give me age. This havi is well done havan. (4)
कांड 2 → सूक्त 17 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation