हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 2.17.5

कांड 2 → सूक्त 17 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 17
श्रोत्र॑मसि॒ श्रोत्रं॑ मे दाः॒ स्वाहा॑ ॥ (५)
हे अग्नि देव! तुम श्रोत्र हो, इसीलिए मुझे श्रोत्र अर्थात्‌ सुनने की शक्ति प्रदान करो. यह हवि भलीभांति हवन किया हुआ हो. (५)
O God of Agni! You are a source, that is why give me the power to listen. This havi is well done havan. (5)