हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 22
चन्द्र॒ यत्ते॒ तप॒स्तेन॒ तं प्रति॑ तप॒ यो॑३ ऽस्मान्द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ॥ (१)
हे चंद्र देव! तुम्हारी जो दूसरों को संतप्त करने की शक्ति है, उस से उन्हें संतप्त करो जो हम से द्वेष करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं. (१)
O Chandra Dev! Anger those who hate us or those we hate with the power you have to anger others. (1)

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 22
चन्द्र॒ यत्ते॒ हर॒स्तेन॒ तं प्रति॑ हर॒ यो॑३ ऽस्मान्द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ॥ (२)
हे चंद्र देव! तुम्हारी जो छीनने की शक्ति है, उस का प्रयोग उन लोगों के सुख, शांति एवं शक्ति छीनने के लिए करो जो हम से द्वेष करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं. (२)
O Chandra Dev! Use the power to take away the power of yours to take away the happiness, peace and power of those who hate us or those whom we hate. (2)

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 22
चन्द्र॒ यत्ते॒ ऽर्चिस्तेन॒ तं प्रत्य॑र्च॒ यो॑३ ऽस्मान्द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ॥ (३)
हे चंद्र देव! तुम्हारी जो दीप्ति है, उस से उन लोगों को दीप्तिहीन बनाओ, जो हम से द्वेष करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं. (३)
O Chandra Dev! Make those who hate us or those whom we hate deeply despise with the brightness of yours. (3)

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 22
चन्द्र॒ यत्ते॑ शो॒चिस्तेन॒ तं प्रति॑ शोच॒ यो॑३ ऽस्मान्द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ॥ (४)
हे चंद्र देव! तुम्हारी जो दूसरों को शोक मग्न करने की शक्ति है, उस के द्वारा उन्हें शोक मग्न करो जो हम से द्वेष करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं. (४)
O Chandra Dev! Grieve those who hate us or those we hate through your power to grieve others. (4)

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 22
चन्द्र॒ यत्ते॒ तेज॒स्तेन॒ तम॑ते॒जसं॑ कृणु॒ यो॑३ ऽस्मान्द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ॥ (५)
हे चंद्र देव! तुम्हारा जो तेज है, उस से उन्हें तेजहीन करो, जो हम से द्वेष करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं. (५)
O Chandra Dev! Make those who hate us or those we hate with your glory. (5)