हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 2.28.5

कांड 2 → सूक्त 28 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 28
इ॒मम॒ग्न आयु॑षे॒ वर्च॑से नय प्रि॒यं रेतो॑ वरुण मित्र राजन् । मा॒तेवा॑स्मा अदिते॒ शर्म॑ यच्छ॒ विश्वे॑ देवा ज॒रद॑ष्टि॒र्यथास॑त् ॥ (५)
हे अग्नि देव! इस बालक को दीर्घ जीवन प्रदान करो एवं तेजस्वी बनाओ. हे तेजस्वी वरुण एवं मित्र देव! इसे पुत्र उत्पन्न करने योग्य वीर्य प्रदान करो. हे अदिति! तुम माता के समान इस बालक को सुख प्रदान करो. हे समस्त देवो! यह ऐसा हो कि इस का शरीर वृद्धावस्था को प्राप्त करे. (५)
O God of Agni! Give this child a long life and make him bright. O stunning Varuna and friend Dev! Provide it with son-producing semen. Hey Aditi! Give happiness to this child like a mother. O all gods! It should be such that its body attains old age. (5)