हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 2.33.6

कांड 2 → सूक्त 33 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 33
अ॒स्थिभ्य॑स्ते म॒ज्जभ्यः॒ स्नाव॑भ्यो ध॒मनि॑भ्यः । यक्ष्म॑म्पा॒णिभ्या॑म॒ङ्गुलि॑भ्यो न॒खेभ्यो॒ वि वृ॑हामि ते ॥ (६)
हे रोगी पुरुष! मैं हड्डियों से, चरबी से, शिराओं से, धमनियों से, हाथों से, हाथों की उंगलियों से तथा नाखूनों से यक्ष्मा रोग को बाहर निकालता हूं. (६)
O patient man! I get tuberculosis out from bones, fat, veins, arteries, hands, fingers and nails. (6)